मैं बनी स्कूल की नंबर वन रंडी - Part 1





 (Mai Bani School Ki Number One Randi-Part 1)

हाय फ्रेंड्स, मेरा नाम अरुणिमा है. मेरी उम्र अभी 19 साल है. मेरे चूचे 32 इंच के हैं, पतली सी कमर 28 इंच की और 36 की मोटी व उभरी हुई सी गांड है. मेरी कोमल से होंठ और नशीली सी आंखें हैं. मैं एकदम गोरी हूँ. मेरे लम्बे नागिन से काले घने बाल, मेरी गांड तक लहराते हैं मेरी चूत भी हल्की गुलाबी सी है. अपने इन्हीं सब मदमस्त अंगों की वजह से मैं बड़े गज़ब की माल हूँ.

मुझे सेक्स करना बेहद पसंद है. मेरी लंड लेने की चाहत कैसे पूरी हुई और मेरी सील कैसे टूटी … वो सब आपको मेरी इस सेक्स कहानी में पढ़ने मिलेगा.

यह बात आज से एक साल पहले उस वक्त की है, जब मैं 18 साल की नई नई जवान हुई थी. मैं 11 वीं पास करके 12वीं क्लास में आई थी. अब तक मैं एकदम दब्बू सी लड़की थी, लेकिन उसके बाद से मेरे शरीर और मुझमें काफी बदलाव आए. अब मुझे लड़कों को देखना अच्छा लगने लगा और मुझे सेक्स की भी इच्छा होने लगी.

इसी सबके के चलते मैं लड़कों को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए बहुत ज़्यादा बोल्ड कपड़े भी पहनने लगी. अपनी सहेलियों से जानकारी लगी, तो मैं ब्लू फिल्म भी देखने लगी और अन्तर्वासना की सेक्स कहानी भी पढ़ने लगी. इन सबसे सेक्स की इच्छा और भी ज्यादा बलवती होने लगी और अब मेरी वासना लंड के लिए हद पार करने लगी.

फिलहाल अपनी बुर की आग शांत करने का कोई तरीका अभी तक मेरे पास नहीं था. मुझे लगने लगा था कि कोई मुझे रगड़ कर चोद दे, लेकिन अभी तक किसी ने भी सामने से मुझसे नहीं बोला था.


जब मैं 12वीं कक्षा में गयी, तो मेरे शरीर में बदलावों के कारण पुराने कपड़े मुझे पहनने में आ ही नहीं रहे थे. ये कुछ बदरंग से भी हो गए थे. सफेद शर्ट भी पीली सी पड़ चुकी थी. इसलिए मुझे स्कूल ड्रेस तो जरूरी में लेनी ही थी.

मैंने घर पर माँ से कहा, तो उन्होंने मुझे कुछ पैसे दे दिए और कहा कि तू अपनी ड्रेस खरीद ला.

मैं अकेली ही अपना ड्रेस लेने दुकान पर चली गयी. मेरे स्कूल की ड्रेस में सफ़ेद शर्ट और ग्रे स्कर्ट था और शनिवार को सफ़ेद स्कर्ट के साथ सफ़ेद शर्ट पहननी होती थी.

मैंने अपनी ड्रेस पहले से एक नंबर छोटा लिया और उसको एकदम फिटिंग का करवा लिया. शर्ट भी हाफ आस्तीन की ले ली. दुकानदार के पास किसी भी ड्रेस को फिट करवाने के लिए एक टेलर बैठता था. मैंने उससे अपनी दोनों स्कर्ट को मिनी स्कर्ट करवा लिया.

फिर अगले दिन जब मैं सुबह नहा कर तैयार होने लगी, तो मैंने खुद को देखा, तो पाया कि मैं बहुत ही ज़्यादा कामुक दिखने लगी थी. मेरी शर्ट मेरे मम्मों पर बिल्कुल फिटिंग की थी. इसमें मेरे 32 इंच के चूचों को दूर से ही कोई देख कर मस्त हो सकता था. नीचे मिनी स्कर्ट होने के कारण से ये मेरे घुटनों के ऊपर तक ही आ रही थी, जिससे मेरी गोरी गोरी जांघें साफ़ दिख रही थीं. मैंने इस कामुक ड्रेस को पहनने के बाद अपने लम्बे बालों का जूड़ा बनाया और स्कूल के लिए निकल गई.

रास्ते में लोगों का ध्यान मेरी मचलती जवानी पर इतना ज्यादा था कि मेरी अनचुदी बुर में चींटियां रेंगने लगी थीं. बुर ने पानी छोड़ दिया था जिस वजह से मेरी चड्डी भी कुछ गीली सी हो गई थी.

मैंने स्कूल पहुंच कर पाया कि सबका ध्यान मेरे पर ही था. सब लड़के मुझे ही घूर रहे थे और टीचर भी.

स्कूल की प्रार्थना का समय हो गया था और मैं लाइन में लग कर खड़ी हो गई. सभी ने नियमित होने वाली प्रार्थना को किया और अपनी क्लास में जाने लगे.

तभी एक अनाउंसमेंट हुआ कि जिसको जिसको रंगोली बनानी आती हो, वे अपने हाथ खड़े करें.

मैंने और दो अन्य लड़कियों ने हाथ खड़े कर दिए.

प्रिंसीपल सर ने हम तीनों को रोक कर बाकी सबको जाने का कह दिया. सभी छात्र अपने कक्ष में चले गए और हम तीनों लड़कियों को प्रिंसीपल सर के ऑफिस में बुला लिया गया.

प्रिंसीपल सर ने बोला- पहले आप लोग एक पेपर पर रंगोली बना कर दिखाओ, जिसकी रंगोली की डिजायन सबसे अच्छी होगी, वो ही रंगोली बनाएगा.

हम तीनों ने पेपर पर डिजायन बनाना शुरू कर दिया. डिजायन बन जाने के बाद सबने प्रिंसीपल सर को दिखाया. जिसमें से प्रिंसीपल सर को मेरी बनाई डिजायन ही अच्छी लगी और मुझे रंगोली बनाने के लिए सिलेक्ट कर लिया गया.

प्रिंसीपल सर के ऑफिस के सामने ही एक गेस्ट रूम था, जिसमें मुझे रंगोली बनानी थी. मेरे क्लास के टीचर उदय सिंह सर भी आ गए. उनकी उम्र अभी 29 साल की थी और वो दिखने में भी बहुत हैंडसम थे. मुझे वो शुरू से पसंद थे. उनके आते ही मुझे दिल से ख़ुशी हुई कि मैं उनको अपनी कला से रूबरू करके उन्हें इम्प्रेस कर लूंगी.

मुझे रंगोली का सामान दिया गया और रूम में मुझे जगह बताई गई कि कहां रंगोली बनानी है. मैंने बैठ कर रंगोली बनानी शुरू कर दी.

अभी कुछ ही देर बीती होगी कि मेरे क्लास टीचर उदय सर झुक कर मुझे रंगोली बनाते हुए देखने लगे. मैं और भी तन्मयता से रंगोली बनाने लगी.

कुछ देर बाद मुझे याद आया कि मेरी स्कर्ट बहुत छोटी है और मैं इस तरह से बैठी हूँ कि मेरी गांड साफ़ दिख रही होगी. सर मेरे पीछे ही थे. ये ध्यान आते ही मैं तुरंत खड़ी हो गयी और पीछे मुड़ कर देखा, तो सर मुझे ही देख रहे थे. शायद उन्होंने मेरे स्कर्ट के अन्दर का नज़ारा देख लिया था. जिस वजह से उनके पैंट का तनाव साफ़ बयान कर रहा था.

मैं मन ही मन मुस्कुराई और उनके सामने से जा कर रंगोली बनाने लगी. इस समय सर मेरे मम्मों की झलक का मजा लेने में लगे थे.


कुछ देर में ही मैंने काम पूरा कर दिया और अपनी मैं क्लास में आ गयी.

वो पूरा दिन ऐसे ही बीत गया. अगले दिन प्रार्थना के बाद हम लोग क्लास में आ गए.

तभी आया जी मुझे बुलाने आईं और बोलीं कि उदय सर तुम्हें बुला रहे हैं.
मैंने पूछा- किधर?
आया ने बताया कि वे मुझे स्कूल के अन्दर वाले प्रार्थना हॉल में बुला रहे हैं.

मैं गई तो मेरे क्लास टीचर उदय सर उधर पहले से ही बैठे थे. उन्होंने मेरे अन्दर आने के बाद दरवाज़ा अन्दर से बंद कर देने का कहा.
मैंने दरवाजा बंद कर दिया.

उदय सर- तुम हारमोनियम बजा लेती हो ना!
मैं- जी सर … थोड़ा बहुत जानती हूँ.
उदय सर- तो जो प्रार्थना होती है, वो इस हारमोनियम पर बजाओ. उसकी धुन सामने लिखी है.

मैंने देखा सामने कॉपी में धुन लिखी थी. मैंने हारमोनियम को बजाना शुरू कर दिया. इस वक्त सर बिल्कुल मेरे पीछे खड़े थे और शायद वो पीछे से मेरी गांड को ताड़ रहे थे. मैंने भी ये महसूस किया, तो अपनी गांड थोड़ी बाहर को निकाल कर खड़ी हो गयी.

कुछ देर प्रैक्टिस करने के बाद सर ने बोला- अब तुम अपनी क्लास में जाओ और रोज़ इसी टाइम यहां सीखने आ जाना क्योंकि तुमको कुछ दिन बाद से ये हारमोनियम बजाना है. अभी तक जो लड़की बजाती थी, वो दूसरे स्कूल चली गयी है. अभी हमारे स्कूल में बिना हारमोनियम के प्रार्थना हो रही है.

कुछ दिनों तक ऐसे ही चलता रहा और इसी सीखने सीखने के चक्कर में मेरे सर ने मेरे साथ बहुत मज़ा भी लिया. हमेशा ही वो मुझे हर जगह छूने लगे थे. कभी मेरी पीठ पर हाथ फेरते, तो कभी कहीं सहला देते.
इस सबमें मुझे भी मज़ा आ रहा था … तो मैंने भी इसका कभी कोई विरोध नहीं किया.

फिर एक दिन बहुत बारिश हो रही थी उस दिन पूरे स्कूल में बहुत कम बच्चे आए थे. मेरे क्लास में सिर्फ मैं और एक लड़की ही आई थी. आज बारिश के कारण टीचर भी बहुत कम आए थे. हालांकि मेरे क्लास टीचर उदय सर आए थे. आज बारिश के कारण प्रार्थना भी नहीं हुई थी.

कुछ देर बाद सर क्लास में आए और उन्होंने हम दोनों की हाजिरी लगाई.

फिर सर मुझसे बोले- आज पढ़ाई तो होनी नहीं है … तुम हॉल में चलो और अपनी प्रैक्टिस कर लो.
उन्होंने दूसरी लड़की को अटेंडस रजिस्टर बनाने को दे दिया.

सर मुझे प्रार्थना रूम में आने के लिए बोलते हुए चले गए- अरुणिमा तुम उधर जाकर प्रैक्टिस शुरू करो, मैं आता हूँ.
मैं वहां चली गई और दरवाज़ा भेड़ कर अभ्यास करने लगी.

तभी कुछ देर बाद उदय सर भी वहां आ गए और अन्दर आकर दरवाज़ा बंद करके मेरे पीछे आकर खड़े हो गए.

मैंने भी सोचा कि आज अच्छा मौका है … स्कूल में लोग भी कम हैं … काश सर मेरे साथ कुछ कर लें और टीचर स्टूडेंट सेक्स स्टोरी का आरम्भ हो जाए.

शायद सर भी यही मूड बना कर आए थे वो एकदम से मेरे पीछे से सट गए और मुझे बताने लगे कि मैं क्या क्या गलती कर रही हूँ. अब तक उनका लंड पूरा तन चुका था, जो कि मेरी गांड की दरार में एकदम से घुसा जा रहा था. मुझे भी मजा आने लगा था, तो मैंने भी अपनी टांगें फैला कर सर के लंड को महसूस कर लिया.

तभी सर ने मेरे कंधे पर एक हाथ रखा और आगे हाथ करके मेरी उंगलियों पर अपनी उंगलियां रख कर मुझे सिखाने का ड्रामा करने लगे. इस समय उदय सर मेरे ऊपर एकदम से लदे से थे.

मैं बिना किसी हील-हुज्जत के हारमोनियम बजाने लगी. तभी उनका दूसरा हाथ मेरी कमर पर आ गया और मेरे शरीर में एकदम झटका सा लगा. मगर मेरी कोई भी प्रतिक्रिया ना पाने से वो और भी मेरे ऊपर चढ़ गए.

अब सर से अपने लंड का दबाव और ज़्यादा मेरी गांड के दरार में देना शुरू कर दिया. फिर सर जो अपना एक हाथ मेरे कंधे पर रखे थे, उन्होंने उसे वहां से हटा कर मेरे पेट पर रख दिया. इससे मेरे शरीर में तो जैसे करंट सा दौड़ गया था.

मुझसे चुदास बर्दाश्त नहीं हो रही थी, बस मन कर रहा था कि उनकी तरफ मुँह करके उनके होंठों को चूमने लगूं और अपनी चुचियों को उनके मुँह में भर दूं. लेकिन अभी ये करना सही नहीं था इसलिए मैंने खुद पर काबू करते हुए हारमोनियम बजाना चालू रखा और उनकी हरकतों का मज़ा लेने लगी.

फिर कुछ देर तक इसी हालत में रहने के बाद उन्होंने हिम्मत करते हुए अपने दोनों हाथों को मेरे मम्मों के नीचे रख कर मुझे पकड़ कर अपने ओर खींच लिया.

उदय सर मुझे अपनी छाती से चिपकाते हुए बोले कि इसको बजाते समय अपने शरीर को सीधा रखा करो, वरना तुम्हारे ये यूं ही झुक जाएंगे.
ये कहते हुए उन्होंने मेरे मम्मों को हल्के से छू दिया.

मैंने हल्की आवाज़ में आह निकालते हुए ‘जी सर..’ बोला.
मेरी किसी भी तरह की आपत्ति न पाते हुए उन्होंने हिम्मत बढ़ा दी.

वो धीरे धीरे पहले अंगूठे से मेरे मम्मों के निचले हिस्से को सहला रहे थे और पीछे से मेरी गांड पर लगातार अपने लंड से दबाव बनाए हुए थे.


फिर कुछ देर में मेरा हल्का सा संतुलन बिगड़ गया, क्योंकि सर बिल्कुल मेरे ऊपर चढ़े हुए थे. इसी वजह से मैं बहुत देर से उनका पूरा भर खुद पर झेल रही थी. संतुलन बिगड़ने से मैं एकदम से बगल में गिरने को हुई, तो उदय सर ने तुरंत मुझे संभालते हुए पकड़ लिया. इसका फायदा उठा कर उन्होंने अपने दोनों हाथों से मेरी दोनों मोटी मोटी चुचियों को थाम लिया.

सर की पकड़ बहुत टाइट थी, जिससे मुझे हल्का दर्द भी हो रहा था … लेकिन मैंने दर्द हो सहते हुए उनका हाथ वहीं पर रहने दिया.

अब वो भी मेरी चूचियों इस तरह से दबाने में लगे थे, जैसे उन्होंने मेरी दोनों चुचियों को निम्बू समझ लिया हो. वे मेरी चूचियों को लगभग निचोड़ने सा लगे थे. मैंने खुद को उनके ऊपर निढाल छोड़ दिया और अपनी चुचियों की मालिश का मज़ा लेने लगी.

कुछ देर तक मेरी चुचियों को मसलने के बाद अब उन्होंने धीरे से मेरे कान को काट लिया. इससे एकदम से मेरी चूत में गुदगुदी सी हो गयी.

वो मेरे एक कान की लौ को अपने मुँह में लेकर चूसने लगे. मैं गनगना उठी थी और उनके सीने में अपने आप को ढीला छोड़ दिया था. उन्होंने मेरे मम्मों को मसलते हुए मेरे कान को चूस चूस कर पूरा गीला कर दिया था. फिर वो मेरे गले को अपनी जीभ से चाटने लगे और होंठों से चुसकने लगे. इसी बीच उन्होंने मुझे हल्की सी लव बाइट भी दे दी थी.

मेरे मुँह से सिर्फ उंह आंह की मादक आवाज निकल रही थी.

सर ने ये सब अपने मुँह से करना जारी रखा और अपने हाथों को मेरी चूचियों से हटा कर मेरी शर्ट के बटन को खोलने लगे. कुछ ही पलों सर ने मेरी शर्ट को उतार कर साइड में रख दिया और मुझे हल्का सा नीचे को झुका कर मेरी पीठ पर चाटने चूमने लगे.

मैं कुतिया सी बनी सर की हरकतों को हवा दिए जा रही थी.

कुछ देर बाद सर ने मेरी स्कर्ट ऊपर उठा कर मेरी गांड के अपनी नाक गांड पर लगा दी और गांड की महक सूंघने लगे. फिर मेरी पैंटी के ऊपर से ही अपनी जीभ से मेरी गांड के छेद को चाटने लगे.
मैंने अपनी टांगें और भी फैला दीं. इसे सर को समझ आ गया कि लौंडिया मस्त होने लगी है.

फिर सर ने मेरी पैंटी एक तरफ हटा कर मेरी गांड के छेद में अपनी जीभ डाली और गांड गीली करने लगे. मुझे बेहद सनसनी होने लगी थी. कुछ देर गांड चाटने के बाद सर ने अपने दोनों हाथों से मेरे चूतड़ों को कुछ इस तरह से दोनों तरह खींचा … जिससे मेरा छेद खुल कर सामने आ जाए. मेरी खुली गुलाबी गांड सर की आंखों में वासना भरने लगी थी.

उदय सर ने मुझे बेहद गर्म कर दिया था. आगे क्या हुआ, ये मैं अपनी टीचर स्टूडेंट सेक्स स्टोरी के अगले भाग में लिखूंगी. आप प्लीज़ लंड हिलाना छोड़ कर पहले मुझे मेल कीजिएगा.

आपकी चुदक्कड़ अरुणिमा



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